Tuesday, April 30, 2013
# Gold Key:Vol.2
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Sunday, March 10, 2013
# अंक 339 -"विद्रोही दानव" - "हज्ज की प्रेम कहानी"
हज्ज हज्ज हज्ज
वेताल की जिस भी कहानी में हज्ज आया , मानो जलजला ही आ गया ! मैं तो जब भी हज्ज की कहानी पढ़ता हूँ तो मुझे यह कभी भी महसूस ही नहीं हुआ की मैं कोई वेताल कथा पढ़ रहा हूँ क्योंकि हज्ज की हर कहानी में वेताल की भूमिका एक 'सहायक' की भूमिका से ज्यादा नहीं होती ! शुरू से लेकर अंत तक बस हज्ज ही हज्ज ! हर कहानी में वेताल की शख्सियत हज्ज की पहाड़नुमा शख्सियत से टकराकर हज्ज के साए के आस पास ही सिमट कर रह जाती है So Ladies & Gentlemen,once again Eighth Wonder of the World,
Hzz
In & As
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Wednesday, March 6, 2013
# Amitabh's Coolie Accident
दोस्तों,आज मैं आपसे उस घटना की चर्चा करने जा रहा हूँ जो कई वर्षों से मेरे ज़ेहन में खदबदा रही थी और जिसके पीछे की सच्चाई मैं हमेशा से ही जानने का इच्छुक रहा था । ....और वह घटना है तक़रीबन आज से तीस साल पहले 24 जुलाई 1982 के दिन फ़िल्म 'कुली' के सेट पर घटित हुई अमिताभ के साथ दुर्घटना जिसने अमिताभ को मौत के मुंह में पहुंचा दिया था जहाँ से उनका वापस आना किसी चमत्कार से कम नहीं था ।
फ़िल्म 'कुली' एक उस दृश्य की शूटिंग चल रही थी जिसमे गोगा कपूर एवं पुनीत इस्सर कुलियों का चिट फंड का पैसा समेट कर भाग रहे हैं और नीलू फुले दूसरे कुलियों के साथ आकर उन्हें रोकता है । लड़ाई शुरू हो जाती है और जब पुनीत इस्सर नीलू फुले का दूसरा हाथ भी काट देने को तत्पर होता है तभी अमिताभ की एंट्री होती है एवं अमिताभ और पुनीत के बीच वन टू वन फाइट शुरू हो जाती है । अमिताभ पुनीत को 4-5 मुक्के जड़ते हैं उसके बाद पुनीत अमिताभ को पकड़कर खंबे से टिकाकर उनके पेट में बायीं तरफ़ एक मुक्का जड़ता है और उन्हें खींच कर फिर मुंह पर एक मुक्का जड़ता है जिसके बाद अमिताभ पास पड़ी एक मेज़ पर कलाबाज़ी खाकर फ़र्श पर गिर जाते है ।
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Labels: Amitabh Bachchan, Coolie
Monday, February 25, 2013
TARZAN GIFT ALBUM - 3 IN 1
This album was published by Kiran Publications. It includes 3 fabulous stories (2 Tarzan stories and 1 bonus Korak story) in big size 50 pages format. This Gift Album is a real gift for every Tarzan/Korak lover all over the world.
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Monday, February 11, 2013
अंक #292 - बहादुर और चुड़ैल की चुनौती
(Friends this post is authored by Vishal bhai for which lots and lots of thanks to him)
हिंदी इंद्रजाल कॉमिक्स के चाहने वालों को मेरा यानि की 'विशाल' का सलाम ! दोस्तों इस बार मैं ले कर आया हूँ बहादुर की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान , इंद्रजाल का अंक # 292 (The Challenge of Witch) यानि की
"बहादुर और चुड़ैल की चुनौती"
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Monday, February 4, 2013
# 6th Anniversary Post
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Monday, January 7, 2013
# Mohammad Rafi
लेकिन 4 बजे के आसपास उन्हें फिर दर्द महसूस हुआ और इस बार शिद्दत के साथ,उन्होंने फ़ौरन घर में मौजूद अपनी बीवी को बुलाया जो उनकी उखड़ती साँसे और नीले पड़ते होंठों को देख घबरा गयी । फ़ौरन नज़दीकी डॉक्टर को बुलवाया गया जिसने उनकी जांच करने के बाद उन्हें नेशनल हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी और रफ़ी साहब को उनकी कार में नेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया ।
नेशनल हॉस्पिटल की लिफ्ट ख़राब थी और ईसीजी रूम ऊपर था लिहाज़ा रफ़ी साहब खुद सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर गए जहाँ लम्बी जांच के बाद पता चला कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है और उन्हें फ़ौरन मुंबई हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी गयी क्योंकि नेशनल हॉस्पिटल में दिल के दौरे के इलाज की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी । लिहाज़ा मुंबई हॉस्पिटल के इंचार्ज से बात कर रफ़ी साहब शाम के 7 तक बजे वहाँ पहुँचे जहाँ उनका मुक़म्मल इलाज शुरू हुआ लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि दौरा पड़ने के बाद से बेहद कीमती समय हॉस्पिटल के चक्कर काटने में जाया हो चुका था । बीच में रफ़ी साहब की तबियत कुछ संभली और उन्होंने अपने साथ मौजूद घर वालों से बात भी की लेकिन फिर जो तबियत बिगड़ी तो सम्भली नहीं और यह अज़ीमतरीन फ़नकार रात 10 बजकर 25 मिनट पर अपने करोड़ों चाहने वालों को छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से चला गया ।
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Thursday, December 6, 2012
# Andha Yuddh
दोस्तों,आज हम एक ऐसी फ़िल्म के बारे में बात करेंगे जिसमे यह विषय बड़ी संजीदगी और संवेदनशीलता के साथ हैंडल किया जाता है और इस फ़िल्म का नाम है 'अँधा युद्ध' ।
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Saturday, December 1, 2012
# Review of The Phantom:The Complete Sundays Vol.1
The Hermes Press publication has already been publishing Phantom Daily Strips in B/W format but in color this volume is first in its series.
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Friday, November 16, 2012
# Waqt
दोस्तों,इसी फ़लसफ़े को सच करते हुए इस साल फिल्मी दुनिया की कई मशहूर हस्तियाँ हमसे बिछड़ गयी जिनकी भौतिक उपस्थिति भले ही हमारे बीच में न हो लेकिन जिनका नाम अपने काम की वजह से हमेशा हम सब के दिलों में जिंदा रहेगा ।
ऐसी ही एक वट वृक्ष सरीखी हस्ती थी मशहूर निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा साहब(1932-2012) की जो अक्टूबर माह में हम सब से बिछड़ गए लेकिन जिनका नाम हिंदी फिल्मी दुनिया में हमेशा यश पाता रहेगा ।
इस सपनों के सौदागर सरीखे निर्देशक को जिसकी फ़िल्मों ने हमें मनोरंजन से परिपूर्ण अनगिनत लम्हे दिए हैं उसे आज हम उसकी एक फ़िल्म पर तब्सिरा कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे ।
यश चोपड़ा यानी यश राज चोपड़ा मशहूर निर्माता-निर्देशक बी.आर.चोपड़ा के छोटे भाई थे जिन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत आई एस जौहर के सह-निर्देशक के रूप में की जिसके बाद यह अपने बड़े भाई के साथ फ़िल्म प्रोडक्शन में जुड़ गए और जिन्होंने स्वतंत्र रूप से इन्हें अपनी फ़िल्म 'धूल का फूल' का निर्देशन सौंपा । 'धूल का फूल' की क़ामयाबी के बाद इन्होने अपने भाई के बैनर के लिए 'धर्मपुत्र','वक़्त','आदमी और इंसान और 'इत्तेफ़ाक' जैसी फ़िल्मों का निर्देशन किया जिनमे से 'वक़्त' और 'इत्तेफ़ाक' ने सफ़लता के झंडे गाड़े जबकि 'धर्मपुत्र' और 'आदमी और इन्सान' ने औसत सफ़लता प्राप्त की ।
आज की इस महफ़िल में हम बात करेंगे फ़िल्म 'वक़्त'(1965) के बाबत जिसकी चटख,चमक और रंग आज लगभग आधी सदी गुज़र जाने के बाद भी फीके नहीं पड़े हैं ।
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Labels: Balraj Sahni, Film, Film Review, Quiz, Rajkumar, Shashi Kapoor, Sunil Dutt, Waqt










